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Jio Prime मेंबरशिप अगले साल मुफ्त, लेकिन सिर्फ मौज़ूदा यूज़र के लिए

Jio Prime मेंबरशिप अगले साल मुफ्त, लेकिन सिर्फ मौज़ूदा यूज़र के लिए जियो प्राइम सब्सक्रिप्शन को लेकर असमंजस की स्थिति साफ हो गई है। रिलायंस जियो ने जानकारी दी है कि मौज़ूदा जियो प्राइम मेंबर को अगले एक साल के लिए यह सब्सक्रिप्शन मुफ्त में मिलेगा। बताया गया है कि जिन रिलायंस जियो यूज़र ने Jio Prime मेंबरशिप के लिए 31 मार्च 2018 या उससे पहले ही सब्सक्राइब किया है, उन्हें कंपनी की ओर से बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के प्राइम सेवा मिलती रहेगी। बता दें कि यह ऑफर सीमित समय के लिए है। ऐसे में मौज़ूदा जियो प्राइम सब्सक्राइबर को इस मेंबरशिप को फिर से एक्टिव करना होगा, जो जियो ऐप के ज़रिए संभव होगा। जिन यूज़र ने अभी तक जियो प्राइम मेंबरशिप नहीं ली है। उन्हें इसके लिए 99 रुपये का भुगतान करना होगा। कंपनी ने जियो प्राइम सब्सक्रिप्शन को लेकर मौज़ूदा और नए प्राइम मेंबर के लिए स्थिति साफ की है। ऐसे मिलेगी एक साल के लिए मुफ्त में जियो प्राइम मेंबरशिप 31 मार्च या उससे पहले जियो प्राइम सब्सक्रिप्शन लेने वाले यूज़र को मुफ्त में अगले साल के लिए मेंबरशिप दी जा रही है। मुफ्त सेवा मायजियो ऐप के ज़रिए हासिल क...

गूगल ने डूडल के ज़रिए आज याद किया चिपको आंदोलन का 45वां साल

चिपको आंदोलन का लक्ष्य उस समय हो रही वनों की कटाई पर ध्यान देना था। सड़कों, बाँधों और उद्योगों के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर वनों को काटा जा रहा था। उत्तर प्रदेश के चमोली जिले में वर्ष 1973 में यह आंदोलन शुरू हुआ और इसकी पहल प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुन्दरलाल बहुगुणा ने की थी। जैसा कि चिपको शब्द से हमें पता चलता है इस आंदोलन में लोग पेड़ों को काटने से बचाने के लिए उन्हें चारों ओर से हाथों से घेर कर पकड़ लिया करते थे। इस आंदोलन की मुख्य बात यह थी कि इसमें महिलाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था आज के गूगल डूडल में दिखाया गया है कि जंगल में मौजूद पेड़ के चारों ओर महिलाएं घेरा बनाए खड़ी हुई हैं और उन्होंने एक दूसरे के हाथों को पकड़ कर पेड़ को सुरक्षित रखने के लिए घेरा बनाया है। मूल चिपको आंदोलन की शुरुआत 18 वीं सदी में राजस्थान में हुई थी। बिश्नोई समुदाय के लोगों के एक बड़े समूह ने पेड़ों की कटाई का विरोध किया। दरअसल, जोधपुर के महाराजा के आदेश पर पेड़ों को काटा जा रहा था लेकिन आंदोलन के तुरंत बाद उन्होंने सभी बिश्नोई गांवों में पेड़ों को काटने पर रोक लगाने के लिये एक शाही ...